ग्वालियर हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा की मांग पर भीम आर्मी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम

ग्वालियर, मध्यप्रदेश

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रहे विवाद ने आज एक निर्णायक मोड़ ले लिया। भीम आर्मी द्वारा आयोजित विशाल जनप्रदर्शन में हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर की सड़कों पर उतरकर अपनी माँगों को मजबूती से रखा और प्रशासन को एक माह का अल्टीमेटम सौंपा।

इस अभूतपूर्व शक्ति प्रदर्शन का नेतृत्व भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विनय रतन सिंह एवं मध्यप्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील बैरसिया ने किया। प्रदर्शन में प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं के साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार से आए अंबेडकरवादी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

विनय रतन सिंह का दो टूक संदेश : “शांति से या क्रांति से – मूर्ति लगाकर रहेंगे”

अपने जोशीले संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विनय रतन सिंह ने कहा:
“ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा हर हाल में स्थापित होगी। हमने प्रशासन और न्यायपालिका को एक महीने का समय दिया है। यदि 30 दिनों में यह माँग पूरी नहीं हुई, तो हम ऐसा जनआंदोलन खड़ा करेंगे जो इतिहास में दर्ज होगा। हम लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मार्ग से अपनी बात मनवाना चाहते हैं, लेकिन अगर हमें रोका गया, तो संघर्ष का मार्ग भी अपनाएंगे।”

उहोंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल मूर्ति स्थापना का नहीं, बल्कि संविधान, न्याय और सामाजिक समरसता के सम्मान की लड़ाई है।

गूंज उठा ग्वालियर: “बाबासाहेब अमर रहें”, “संविधान के रचयिता को सम्मान दो”

प्रदर्शन के दौरान ग्वालियर शहर “शांति से या क्रांति से – मूर्ति लगाके रहेंगे”, “संविधान निर्माता को सम्मान दो”, “दलित विरोधी मानसिकता मुर्दाबाद” जैसे नारों से गूंज उठा। इसमें महिलाओं, युवाओं और छात्र संगठनों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

प्रदर्शनकारियों ने ग्वालियर बार एसोसिएशन व कुछ वकीलों की ओर से प्रतिमा स्थापना का विरोध किए जाने पर तीखा प्रतिरोध जताया और इसे “दलित-विरोधी मानसिकता” बताया।

प्रतिमा स्थापना : संविधान और समावेशी न्याय का प्रतीक

भीम आर्मी का कहना है कि जब देश के सर्वोच्च न्यायालय में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित है, तो ग्वालियर हाईकोर्ट में उसका विरोध क्यों? यह सवाल सिर्फ सम्मान का नहीं, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली की समावेशिता और बहुजन समाज की भागीदारी का भी है।

प्रशासन और न्यायपालिका को अंतिम चेतावनी

भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि एक महीने के भीतर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना नहीं होती, तो ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा।

“हमारा संघर्ष अहिंसात्मक होगा, लेकिन यदि संवैधानिक रास्ते को अवरुद्ध किया गया, तो सत्याग्रह से संघर्ष की ओर बढ़ना भी हमारी मजबूरी होगी।”

                                                                                                          रिपोर्ट-विशाल कुमार      

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Head Writer for technology and AI at mpcgsamachar.in. He specializes in demystifying the latest advancements in Artificial Intelligence and the broader tech industry, providing readers with clear, insightful analysis on innovation and its real-world impact.

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