संवाददाता द्वारा भोपाल, 14 नवंबर 2025
भारतीय रेलवे जहाँ एक तरफ ऑनलाइन तत्काल टिकट धांधली को रोकने के लिए ‘आधार’ जैसे नए नियम ला रही है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर एक अलग ही ‘ऑफलाइन’ घोटाला चल रहा है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा ही ‘तत्काल माफिया’ रैकेट सामने आया है, जिसका मास्टरमाइंड कथित तौर पर टिकट रिजर्वेशन सेंटर के बाहर का पार्किंग स्टाफ है और इस खेल में रेलवे टिकट कर्मचारियों की मिलीभगत के भी गंभीर आरोप लगे हैं।
इस पूरी घटना का पर्दाफाश एक स्थानीय नागरिक रवि ने किया, जो खुद इस धांधली के भुक्तभोगी बने।
7 घंटे का इंतजार, और 2 मिनट का ‘खेल’
प्रत्यक्षदर्शी रवि के अनुसार, वह और कई अन्य आम यात्री तत्काल टिकट के लिए सुबह 4-5 बजे से ही भोपाल स्टेशन के काउंटर पर लाइन में लगे थे। वे 6 से 7 घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लेकिन जैसे ही काउंटर खुलने का समय नजदीक आया, एक संगठित गिरोह ने पूरे सिस्टम को हाईजैक कर लिया।
रवि ने बताया, “अचानक दो लोग आए और उन्होंने अपनी एक अलग लिस्ट बना ली। उस लिस्ट में उन्होंने अपने 8 लोगों के नाम सबसे ऊपर लिख दिए। हम लोग जो 7 घंटे से इंतजार कर रहे थे, हमारे नाम उस लिस्ट में सबसे नीचे डाल दिए गए। जब हमने विरोध किया, तो 8 लोगों की एक टीम ने हम पर दबाव बनाया।”

पार्किंग स्टाफ निकला ‘मास्टरमाइंड’
आरोपों के मुताबिक, इस पूरे रैकेट को टिकट रिजर्वेशन सेंटर के ठीक बाहर काम करने वाला एक पार्किंग कर्मचारी चला रहा है। वह अपने 8-10 लोगों की टीम के साथ मिलकर पूरी तत्काल लाइन को नियंत्रित करता है। ये लोग आम नागरिकों को डरा-धमकाकर उन्हें लाइन में पीछे कर देते हैं और अपने लोगों को आगे लगा देते हैं, ताकि वे टिकट लेकर बाद में उन्हें ब्लैक में ऊंचे दामों पर बेच सकें।
नागरिकों के साथ बहस कर रहे इन दलालों और लिस्ट में हेरफेर करने वाले मुख्य आरोपी (पार्किंग स्टाफ) की तस्वीरें भी सबूत के तौर पर मौजूद हैं।

139 पर शिकायत, पुलिस आई… पर घोटाला नहीं रुका
जब ‘तत्काल माफिया’ के लोगों ने आम यात्रियों के साथ बदसलूकी शुरू की, तो रवि ने तुरंत रेल मदद हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने मौके से उन अनधिकृत व्यक्तियों और टिकट दलालों को हटा दिया, जो अवैध रूप से लाइन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद, रवि और अन्य वास्तविक यात्रियों को उनका सही स्थान मिला और रवि को काउंटर पर पहला नंबर मिल गया।
लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ।
टिकट बाबू की मिलीभगत?
रवि ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काउंटर पर बैठे रेलवे टिकट एग्जीक्यूटिव की इन दलालों के साथ सीधी मिलीभगत है।
रवि के अनुसार, “सुबह ठीक 11 बजे (स्लीपर क्लास तत्काल का समय) जब काउंटर खुला, तब मैं पहले नंबर पर था। लेकिन काउंटर पर मौजूद टिकट एग्जीक्यूटिव ने मेरा फॉर्म लेने से इनकार कर दिया और किसी न किसी बहाने से मुझे टालता रहा। इसी बीच, उसने उन टिकट दलालों की टिकटें बना दीं, जिन्हें पुलिस ने भगा दिया था।”
कुछ ही मिनटों के भीतर, पहले नंबर पर खड़े रवि को जवाब मिला कि “टिकटें खत्म हो गईं।” 7 घंटे लाइन में लगने, 139 पर शिकायत करने और पुलिस की मदद मिलने के बावजूद, आम नागरिक को टिकट नहीं मिला और माफिया अपने मंसूबों में कामयाब हो गया।
इस घटना ने रेलवे काउंटर सिस्टम पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यात्रियों की मांग है कि रेल प्रशासन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करे, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए और आरोपी पार्किंग स्टाफ व संदिग्ध टिकट एग्जीक्यूटिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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