महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन: अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

दिनांक: 10 जुलाई 2025, गुरुवार (आषाढ़ी पूर्णिमा)
स्थान: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक, बालाघाट, मध्य प्रदेश
आयोजक: महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति, बालाघाट

कार्यक्रम का विवरण:
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के तत्वावधान में 10 जुलाई 2025 को जिला स्तरीय त्रिरत्न बुद्ध विहार, बौद्ध नगर, कोसमी, बालाघाट में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य भदन्त धम्मशीखर जी द्वारा परित्राण पाठ और ध्यान साधना के साथ हुई।

उपोसथ का महत्व:
पूज्य भदन्त धम्मशीखर जी ने आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर उपोसथ के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि तथागत बुद्ध ने उपोसथ की शिक्षा मन को शुद्ध, पवित्र, शांत और एकाग्र करने के लिए दी थी। उपोसथ का उद्देश्य उपासना नहीं, बल्कि द्वेष, घृणा, ईर्ष्या और दुर्भावना को नष्ट करना है। उन्होंने कहा कि उपोसथ का भोजन से कोई संबंध नहीं है। तथागत ने शरीर की आवश्यकता के अनुसार संतुलित भोजन करने और दिखावे से बचने की शिक्षा दी। न बहुत कम और न बहुत अधिक भोजन करना चाहिए, क्योंकि कम भोजन शरीर को नुकसान पहुँचाता है और अधिक भोजन आलस्य व आसक्ति को जन्म देता है।

कार्यक्रम का क्रम:
1. परित्राण पाठ और संघ दान: परित्राण पाठ के बाद संघ दान और सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया।
2. धम्म रैली: त्रिरत्न बुद्ध विहार, कोसमी से उपासक-उपासिकाओं ने धम्म रैली के रूप में पैदल यात्रा की और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक, बालाघाट पहुँचे।
3. माल्यार्पण और त्रिशरण-पंचशील: वहाँ डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। पूज्य भदन्त धम्मशीखर जी ने त्रिशरण और पंचशील प्रदान किए।

धरना प्रदर्शन:
धरना स्थल पर पूज्य भदन्त धम्मशीखर जी और सामाजिक वक्ताओं ने महाबोधि महाविहार को बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने केंद्र सरकार, बिहार सरकार और सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि:
– महाबोधि महाविहार को शीघ्र बौद्धों को सौंपा जाए।
– इसका प्रबंधन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय के नियंत्रण में दिया जाए।

प्रदर्शन में भागीदारी:
प्रदर्शन में सैकड़ों उपासक और उपासिकाएँ शामिल हुए, जिन्होंने महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया।

मांगें:
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की प्रमुख मांगें हैं:
1. महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
2. बोधगया टेंपल एक्ट, 1949 को तुरंत रद्द किया जाए।
3. बौद्ध धार्मिक मामलों में राज्य के हस्तक्षेप को समाप्त किया जाए।

संदर्भ:
यह आंदोलन बिहार के बोधगया में 12 फरवरी 2025 से चल रहे धरना प्रदर्शन का हिस्सा है, जहाँ बौद्ध भिक्षु और अनुयायी महाबोधि महाविहार को गैर-बौद्ध नियंत्रण से मुक्त करने और 1949 के बोधगया टेंपल एक्ट को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

यह धरना प्रदर्शन बौद्ध समुदाय की आस्था और अस्मिता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं और सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।                                                                     

                                                                                                  रिपोर्ट-विशाल कुमार

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Head Writer for technology and AI at mpcgsamachar.in. He specializes in demystifying the latest advancements in Artificial Intelligence and the broader tech industry, providing readers with clear, insightful analysis on innovation and its real-world impact.

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