MP में कोरोना के 5 एक्टिव केस,जांचे हो रही कम :​​​​​​​ राजधानी के सरकारी अस्पताल आदेश के इंतजार में; 5 करोड़ की मशीनों में धूल चढ़ी

देश में कोरोना वायरस एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है, जिसने स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। देश में सक्रिय (एक्टिव) मामलों की संख्या 1047 हो गई है। जो तीन दिन पहले लगभग 316 थी।

मध्यप्रदेश में भी 5 एक्टिव केस है। इनमें इंदौर में 4 और उज्जैन में 1 कोविड केस दर्ज किया गया है। कोरोना के इन बढ़ते मामलों के पीछे वायरस के लगातार हो रहे म्यूटेशन और दो नए सब-वैरिएंट का सक्रिय होना मुख्य कारण माना जा रहा है।

कोरोना जांच के आदेश के इंतजार में सरकारी हॉस्पिटल

एक्सपर्ट के अनुसार, कोरोना के बढ़ते मामलों की सटीक वजह जानने और किस वैरिएंट का कितना प्रभाव है, इसकी पुष्टि के लिए ज्यादा से ज्यादा संदिग्ध मरीजों की जांच और उनके सैंपल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग कराना अनिवार्य है।

लेकिन, मध्य प्रदेश की राजधानी में राज्य के सरकारी अस्पताल (जेपी अस्पताल और हमीदिया अस्पताल) अभी भी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से आदेश आने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में स्थित स्टेट वायरोलॉजी लैब ने तो शासन से आरटी-पीसीआर किट उपलब्ध कराने की मांग की है, जो जांच की धीमी गति का संकेत है।

ओमिक्राॅन का सब वैरिएंट है JN.1
कोरोना वायरस का JN.1 वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन है। इसे अगस्त 2023 में पहली बार देखा गया था और दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया।

इस वैरिएंट में लगभग 30 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को चकमा देने में सक्षम बनाते हैं। वर्तमान में JN.1 वैरिएंट के दो सब-वैरिएंट (NB.1.8.1 और LF.7) सक्रिय बताए जा रहे हैं।

हालांकि, एम्स के डॉक्टरों ने आश्वस्त किया है कि JN.1 तेजी से फैलता जरूर है, लेकिन यह आमतौर पर गंभीर बीमारी पैदा नहीं करता। फिर भी, दुनिया के कई हिस्सों में यह सबसे आम वैरिएंट बना हुआ है, जो सतर्कता की आवश्यकता को दर्शाता है।

धूल फांक रही 5 करोड़ की मशीन
कोविड जैसे खतरों को फैलने से रोकने, उनके असर की बारीकी से निगरानी करने और सटीक जानकारी देने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मध्य प्रदेश की स्टेट वायरोलॉजी लैब को 5 करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन दी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि यह मशीन तब से धूल खा रही है और इसका उपयोग नहीं हो रहा है।

कोरोना की दूसरी लहर में हुई भारी मौतों के बाद, मध्य प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में जीनोम सीक्वेंसिंग लैब स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन, भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की स्टेट वायरोलॉजी लैब और इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज को छोड़कर, बाकी किसी भी मेडिकल कॉलेज में अभी तक मशीनें नहीं आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में इंदौर और भोपाल के सरकारी अस्पतालों को अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच करनी चाहिए और पॉजिटिव आए सैंपल्स को लैब में भेजना चाहिए, ताकि प्रदेश में कौन सा वैरिएंट ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रहा है, इसकी सटीक जानकारी मिल सके।

सिर्फ एम्स में आरटीपीसीआर जांच, बनाई टास्क फोर्स
कोविड-19 अलर्ट के बीच, एम्स भोपाल ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। संस्थान ने किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। एम्स में आरटी-पीसीआर जांच भी लगातार हो रही है, जिससे कोविड संक्रमण की सटीक पहचान संभव है।

एम्स ने सोमवार को आधिकारिक सूचना जारी कर बताया कि एक समर्पित कोविड जनरल वार्ड सक्रिय कर दिया गया है, जिसमें 6 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था है। साथ ही, वेंटिलेटर की सुविधा वाला एक आईसीयू भी तैयार रखा गया है।

नए वैरिएंट्स से घबराए नहीं, सतर्क रहे

एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि नए वैरिएंट्स को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि एम्स किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और संस्थान समय पर जांच और बेहतर हेल्थ सर्विसेज देने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य हर नागरिक तक सही जानकारी पहुंचाना और भय के बजाय सतर्कता को प्राथमिकता देना है। उन्होंने नागरिकों को मास्क लगाने, नियमित रूप से हैंड वॉश करने और भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचने जैसी कोविड-अनुकूल आदतों को फिर से अपनाने की सलाह दी।

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Head Writer for technology and AI at mpcgsamachar.in. He specializes in demystifying the latest advancements in Artificial Intelligence and the broader tech industry, providing readers with clear, insightful analysis on innovation and its real-world impact.

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