बालाघाट में तीन नाबालिग और एक युवती से गैंगरेप के मामले में रूह कंपाने वाला खुलासा हुआ है। घटना के बाद दोनों गांव की संयुक्त पंचायत दो दिन तक हुई। इस दौरान आरोपियों की तरफ से केस दर्ज न कराने के लिए पीड़िताओं को सात लाख रुपए का ऑफर दिया गया।
हालांकि लड़कियों ने भरी पंचायत में सबको आपबीती बताई। वे आरोपियों को सबक सिखाने पर अड़ी रहीं। घटना से जुड़े लोगों का कहना है कि मामला पुलिस तक न पहुंचे, इसके लिए गांव में दो दिन पंचायत हुई।
शनिवार को पुलिस ने चारों को किसी नुकसान से बचाने के लिए अपने प्रोटेक्शन में ले लिया। उन्हें बालाघाट के हाई सिक्योरिटी जोन में बने गेस्ट हाउस में रखा है। यहां वे केवल अपने माता-पिता से ही मिल सकती हैं। इधर, पीड़ितों के गांव में भी सन्नाटा है।
घटना 23 अप्रैल की रात की है। रविवार को सर्व आदिवासी समाज की अध्यक्ष मीना उइके और गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भुवन सिंह कोर्राम पीड़ितों के परिजन से मिलने गांव पहुंचे। दैनिक भास्कर की टीम भी गांव गई।
परिजन से मुलाकात के बाद उन्होंने भास्कर से बात की। मीना उइके और भुवन सिंह कोर्राम ने घटना वाली बुधवार रात से लेकर रविवार तक जो हुआ, उसके बारे में जानकारी दी।
शादी थी, रात डेढ़ बजे तक डांस हुआ
आदिवासी समाज में रिवाज है कि शादी और दूसरे कार्यक्रमों में आसपास के गांवों की पंचायत को भी न्योता दिया जाता है। पंचायत को न्योता मिलना यानी पूरा गांव शादी में बुलाया गया है। उस दिन यहां से चार किलोमीटर दूर एक गांव में एक युवक की शादी थी। पंचायत को न्योता आया था, तो यहां के कई लोग शामिल होने गए थे।
दिनभर शादी की रस्में चलीं। शाम को सभी का खाना हुआ। इसके बाद आदिवासियों में डांस करने की परंपरा है। सज-धज कर युवक-युवतियां अलग-अलग डांस करते हैं। यह देर रात तक चलता है। इन बच्चियों ने भी उस रात सबके साथ नृत्य किया था।
रात करीब डेढ़ बजे तक कार्यक्रम चला। उसके बाद बच्चियों ने उसी वक्त वापस घर जाने का मन बना लिया। किसी ने मना इसलिए नहीं किया, क्योंकि हमारे यहां तो किसी भी समय कोई कहीं भी आ जा सकता है। चाहे वो महिला हो या पुरुष। कहीं कोई दिक्कत नहीं है।
नशे में धुत युवकों ने लड़कियों को रास्ते में रोका
बच्चियों के साथ गांव का एक युवक भी था। चारों लड़कियां सात साल की एक बच्ची को लेकर उस युवक के साथ गांव के लिए निकल गईं। करीब एक-डेढ़ किलोमीटर दूर पहुंची ही होंगी कि उनके पीछे समाज के 7 लड़के बाइक से पहुंच गए। उन्होंने रास्ते में लड़कियों को रोकने की कोशिश की। सभी लोग शराब के नशे में धुत थे।
खुद को बचाने के लिए लड़कियों ने दौड़ लगा दी
बच्चियां नहीं रुकीं, उन्होंने खुद को बचाने के लिए छोटी बच्ची को गोद में लेकर दौड़ लगा दी। उनके साथ का युवक भी पीछे-पीछे दौड़ा। सातों बदमाश दो बाइक से कच्चे रास्ते से लड़कियों का पीछा करते रहे।
करीब आधा किलोमीटर दूर एक संकरी सी जगह पर बच्चियों को रोक लिया। यहां भी लड़कियों ने बचने की कोशिश की और उनसे भिड़ गईं। सातों आरोपी बच्चियों से उम्र में काफी बड़े थे। उन्होंने बच्चियों को काबू में कर लिया।
साथ वाले युवक ने हिम्मत दिखाई तो उसे पीटा
इस बीच, बच्चियों के साथ वाले युवक ने उन्हें बचाने के लिए डंडा उठा लिया। दो-तीन आरोपियों ने उसे भी पकड़ लिया। एक ने उसका गला दबाते हुए जान से मारने की धमकी दी। उसकी पिटाई भी की। उसे 50 रुपए देते हुए डरा-धमका कर भगा दिया। जान से मारने की धमकी की ऐसी दहशत हुई कि वह भागते हुए तीन किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचा और सो गया।
भागने की कोशिश करतीं तो जमीन पर पटक देते
इसके बाद आरोपियों ने बच्चियों से बारी-बारी से दुष्कर्म किया। बच्चियां भागने की कोशिश करतीं, तो वे उन्हें फिर से जमीन पर पटक देते। रात 2 बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक बच्चियों से दुष्कर्म करते रहे। नाबालिग लड़कियों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच है, जबकि एक पीड़ित की उम्र 21 वर्ष है।
जो छोटी बच्ची उनके साथ थी, वो रो रही थी, आरोपियों ने उसे डराकर उसी जगह बैठा दिया, जहां वे चारों बच्चियों से दुष्कर्म कर रहे थे।
एक-डेढ़ घंटे तक लड़कियां वहीं बेसुध पड़ी रहीं
वारदात के बाद आरोपी जिस रास्ते से आए थे, उसी से वापस चले गए। एक-डेढ़ घंटे तक लड़कियां वहीं बेसुध सी पड़ी रहीं। फिर सभी ने अपने आपको संभाला, लेकिन उनसे चलते तक नहीं बन रहा था। घिसटती सी घर पहुंचीं।
पीड़िताएं बोलीं- इन्हें फांसी पर लटका देखना है
इधर, गांव में मामले में समझौता कराने की कोशिश होने लगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद दोनों गांव की पंचायत दो दिन तक चली। कई लोग जमा हो गए। बच्चियों के परिजन को कई तरह का लालच दिया गया। दो-दिन तक पंचायत चली, लेकिन बच्चियां अड़ गईं। कहने लगीं कि वे इन्हें फांसी पर लटका देखना चाहती हैं।
बच्ची बोली- हमने रहम के लिए इनके पैर तक पकड़े
भरी पंचायत में एक पीड़िता ने कहा- इन लोगों ने हमारे साथ ज्यादती की है। छोटी लड़कियों को नहीं छोड़ा। हम इनके हाथ-पैर जोड़ रहे थे। रहम के लिए पैर पकड़ रहे थे। लेकिन, ये हम पर बारी-बारी से टूट पड़। अब कोई समझौता नहीं होगा। इन्हें फांसी दे दो। हम कानूनी कार्रवाई चाहते हैं।’
इसके बाद भी पंचायत ने उसे समझाने की कोशिश की। जब वो नहीं मानी तो घटना के दो दिन बाद बाद 25 अप्रैल को सामूहिक दुष्कर्म का मामला हट्टा थाना में दर्ज किया गया। गांव के ही पंच का कहना है-
इस मामले के बाद दो बार बैठक हुई। पहली 24 अप्रैल की रात 7 से 12 बजे तक। दूसरी 25 की सुबह 9 बजे से। लड़की ने जब कानूनी कार्रवाई की बात कही। हम सभी लोग गोदरी चौकी पहुंचे। वहां से हट्टा थाने भेजा गया। यहां मामला दर्ज किया गया।’
इसके बाद MPCG SAMACHAR की टीम उस गांव में पहुंची, जहां बच्चियां शादी में गई थीं। यहां हमारी मुलाकात दूल्हे के पिता से हुई। वे शादी के मंडप में खड़े थे।
दूल्हे के पिता बोले-बच्चियां मेहमान बनकर आई थीं
दूल्हे के पिता ने बताया कि 21 अप्रैल को बेटे का फलदान था। 22 को बारात गई। 23 को बारात दोपहर तक वापस आ गई। शाम को आसपास के गांव के लोगों को मिलाकर करीब एक हजार से ज्यादा लोगों का खाना था। कई पंचायतों को न्योता दिया था। वे बच्चियां भी हमारी मेहमान बनकर आईं थी।
देर रात तक डीजे पर सबने डांस किया। रात 2 बजे वह लौट रहीं थी। उनके साथ गांव का एक युवक भी था। उसी समय में फ्रेश होकर खेत से वापस आ रहा था। वे सभी लोग मुझे रास्ते में मिले। मैंने कहा- सुबह चले जाना, वो युवक बोला टॉर्च है। कोई दिक्कत नहीं होगी।
सुबह बच्चियों की मां आईं, उन्होंने घटना बताई
सुबह, बच्चियों की मां यहां आईं। उन्होंने पूरी घटना बताई। हमने अपने तरीके से खोज खबर ली तो दुष्कर्म करने वाले मुकर गए। फिर शाम को पंचायत हुई, तो भी उन्होंने ऐसा कुछ होने से साफ मना कर दिया।
24 अप्रैल की ही आधी रात के बाद हम लोग घर के बाहर बैठे थे, तभी हमारे समाज का एक व्यक्ति उनके गांव से आया। उसने कहा- सात लड़कियों के हिसाब से सात लाख देने को तैयार है, समझौता करा दो। मामला पुलिस तक नहीं जाना चाहिए।
ये आरोपी गिरफ्तार
लोकेश मात्रे (22)
लालचंद खरे (34)
अजेन्द्र बाहे (28)
अज्जु बगडते (21)
राजेन्द्र कावरे (20)
मानिराम बाहे (21)
इगलेश मात्रे (19)
दो शादीशुदा- एक के तीन बच्चे, दूसरे की पत्नी गर्भवती
गैंगरेप के सातों आरोपी भगतपुर के रहने वाले हैं। इनमें दो शादीशुदा हैं। लालचंद खरे तीन बच्चों का पिता है। वहीं, अजेंद्र बाहे की पत्नी गर्भवती है। लोकेश मात्रे, अज्जू बड़गते, राजेंद्र कावरे, मनीराम बाहे और इगलेश मात्रे की शादी नहीं हुई है।
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