27 नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद जवानों का जश्न VIDEO : नाच-गाकर रंग-गुलाल उड़ाए, परिजनों ने आरती उतारी; 10 करोड़ का इनामी था

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर पर जिस नक्सली बसवा राजू का एनकाउंटर किया गया, उसपर 10 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। इस नक्सल ऑपरेशन की सफलता का जश्न डीआरजी के जवान नाच-गाकर और रंग-गुलाल खेलकर मना रहे हैं। ऑपरेशन से लौटने पर परिजनों ने सुरक्षाबलों की आरती उतारी।

बसवा राजू देश का सबसे बड़ा मोस्ट वांटेड नक्सली था। 6 राज्यों की पुलिस को इसकी तलाश थी। अंततः अबूझमाड़ में DRG जवानों के हाथों बसवा राजू मारा गया। इसके साथ ही अन्य 26 और नक्सली मारे गए हैं। इनमें 25 लाख का इनामी जंगू भी शामिल है।

जश्न की तस्वीरें देखिए-

नक्सलियों की लाश के सामने ही जंगल में जश्न

बसवा राजू नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन महासचिव के पद पर था। एनकाउंटर करने के बाद जवानों ने सभी नक्सलियों की लाश के सामने ही जंगल में जश्न मनाया। साथ ही नारायणपुर शहर में आतिशबाजी की गई। पटाखें फोड़े गए।

ऐसा इसलिए क्योंकि देश में हुई अधिकांश नक्सल घटनाओं का यही मास्टरमाइंड था। इसलिए DRG जवानों ने इसकी मौत का जश्न मनाया।

25 लाख का इनामी जंगू भी ढेर

बसवा राजू के अलावा नक्सल संगठन के 26 और नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया। इनमें 25 लाख रुपए का इनामी नक्सली और DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) जंगू नवीन उर्फ मधु भी मारा गया है।

इसके अलावा 10 लाख, 8 लाख रुपए के भी कई इनामी नक्सली एनकाउंटर में ढेर हुए हैं। सभी नक्सलियों पर कुल 11 करोड़ 60 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

ये हथियार हुए बरामद

मौके से जवानों ने 3 AK-47, 4 SLR, 6 इंसास, 1 कार्बाइन, 6 303, 1 BGL लॉन्चर, 1 रॉकेट लॉन्चर, 2 बारा बोर बंदूक, 2 भरमार समेत अन्य गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।

बसवा राजू के बारे में जानिए…

बसवा राजू आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के जियन्नापेंटा का रहने वाला था। इसने बीटेक तक की पढ़ाई की थी। ये इंजीनियर था। फर्राटेदार इंग्लिश बोलता था। छोटी उम्र में ही नक्सल विचारधारा से प्रभावित हुआ और इसने नक्सल संगठन जॉइन कर लिया। ACM, DVCM, DKSZCM, CCM के बाद पोलित ब्यूरो तक पहुंचा। वर्तमान में ये नक्सल संगठन का महासचिव था।

देश में अलग-अलग 10 नामों से थी पहचान

ये एक ऐसा नक्सली था जो छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और महाराष्ट्र में अलग-अलग 10 नामों से जाना जाता था। जिसमें बसवा राजू उर्फ नम्बाला केशव राव उर्फ गगन्ना उर्फ प्रकाश उर्फ केशव उर्फ कृष्णा उर्फ वासवराज उर्फ राजू उर्फ कमलेश उर्फ कमलू नाम से जाना जाता था। छ्त्तीसगढ़ में बसवा राजू और केशव दादा के नाम से चर्चित था।

अबूझमाड़ को बनाया था नया ठिकाना

बसवा राजू लंबे समय तक झारखंड के बूढ़ा पहाड़ में रह चुका है। वहां से फिर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ इन 3 राज्यों में इसका मूवमेंट था। पहले बस्तर के अबूझमाड़ में इसने अपना ठिकाना बना रखा था।

कुछ महीने पहले ही वहां से कर्रेगुट्टा इलाके में गया। लेकिन जब वहां फोर्स का मूवमेंट होना शुरू हुआ तो नक्सलियों ने बसवा राजू को सुरक्षा के साथ वहां से निकाला। इसे अबूझमाड़ में शिफ्ट किया।

3 दिन के ऑपरेशन के बाद मारा गया

जिसके बाद को सूचना मिली की ये अबूझमाड़ के बोटेर इलाके में मौजूद है। फिर 19 अप्रैल को दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और कोंडागांव के DRG जवानों को ऑपरेशन पर निकाला गया था। 21 मई की सुबह बसवा राजू को जवानों के आने की सूचना मिल गई थी। वह अपनी टीम के साथ दूसरी जगह मूवमेंट करने निकल गया था।

शव लेकर आए जवान

बसवा राजू दूसरी जगह शिफ्ट होने के फिराक में था। लेकिन इन चारों जिलों के सैकड़ों जवानों ने 19 और 20 तारीख को उस पूरे इलाके को घेर लिया थ। फिर 21 मई की सुबह जवानों की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हो गई। सुबह करीब 11 बजे तब बसवा राजू के मारे जाने की खबर सामने आई। शाम तक पुलिस ने इसकी पुष्टि कर दी थी।

Author Profile

Reporter
Reporter
Head Writer for technology and AI at mpcgsamachar.in. He specializes in demystifying the latest advancements in Artificial Intelligence and the broader tech industry, providing readers with clear, insightful analysis on innovation and its real-world impact.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top