कई देशों में फिर कोविड की दस्तक : स्वास्थ्य विभाग की सलाह- गाइडलाइन का पालन करें; फिर से अपनाए पुराने तरीके, मास्क पहने, दूरी बनाकर रखें

5 साल पहले अचानक से पूरी दुनिया को गहरे जख्म दे चुका कोरोना वायरस यानी कोविड-19 एक बार फिर तेजी से दस्तक दे रहा है। भारत में भी पिछले कुछ दिनों से लगातार कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे है, जिसको लेकर स्वस्थ्य विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

मध्यप्रदेश में भी कोरोना संक्रमण को लेकर अलर्ट है। जबलपुर संभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि भारत में कुछ जगह पर कोरोना के पॉजिटिव केस आए है, पर इससे डरने की जरूरत नहीं है, हालांकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई एडवाइजरी जारी नहीं हुई है, और ना ही कोई केस पॉजिटिव आया है, लक्षणों के आधार पर ही यह कहा जा रहा है।

जबलपुर सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा का कहना है कि बीते कुछ दिनों से सिंगापुर, मलेशिया में तेजी से कोरोना के केस बढ़ रहे है। भारत में भी दिल्ली के अलावा कई अन्य शहरों में कोरोना संक्रमण के लक्षण वाले मरीज मिले है। पर इससे पहले कोविड की दो लहरों को हम जूझ चुके है, इस वायरस से कैसे बचना चाहिए, क्या करना चाहिए, यह अच्छे से जान चुके है, इसलिए अब इस वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है। लोग अभ्यसत हो चुके है कोरोना से लड़ने को लेकर।

सीएमएचओ ने सभी से मांग की है कि जैसे कोरोना के समय एहतियत बरतते थे, उसी तरह से रहे, भीड़भाड़ वाले इलाके में मास्क पहनकर जाए, दूरियां बनाकर रखे, मास्क लगाए, अगर किसी को सर्दी, खांसी या फिर बुखार के लक्षण मिलते है, तो तुरंत ही अस्पातल जाकर डॉक्टर की सलाह ले।

खराब गला, जुकाम या बुखार होने पर तुरंत डॉ से मिले

सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा ने बताया कि सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि आखिर इस मौसम में कोरोना वायरस क्यों फैल रहा है। उन्होंने बताया कि यह एक तरह का ओमिक्रोन का ही वेरिएंट है, जिसे हम नए ओमिक्रॉन सब वेरिएंट LF.7 और NB.1.8 कहते हैं।

उन्होंने बताया कि सबसे अच्छी बात इसकी यह है कि इसके लक्षण हल्के हैं, जैसे गला खराब, जुकाम और बुखार इन लक्षणों के दिखने पर लोगों को जरूरी है कि वो डॉक्टर से मिले और अपनी जांच कराएं। उन्होंने बताया कि हर साल इस मौसम में इस तरह के मामले देखने के लिए मिल रहे हैं पिछले कुछ सालों से, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है।

सीएमएचओ का कहना है कि इससे पहले जो कोरोना के केस बिगड़े थे, उसकी वजह यह थी कि लोगों ने स्वस्थ्य विभाग की गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए सोशल डिस्टेंस बनाया नहीं था। लोगों ने इस को बहुत हल्के से लिया। कोरोना वायरस को लेकर जब टीकाकरण हुआ था, तो पहले डोज में 90 प्रतिशत लोगों ने टीका लगवाया था, वहीं दूसरा डोज में संख्या 68 प्रतिशत पहुंची और फिर तीसरे डोज में दो अंको में भी टीकाकरण नहीं पहुंच पाया। लोगों को यह लगने लगा था कि अब यह बीमारी चली गई है, और तीसरा डोज ना लगवाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, इसे सीरियस लेने की जरूरत है, क्योंकि हमारे देश की जनसंख्या बहुत ज्यादा है, ऐसे में वायरल फैलने में ज्यादा समय नहीं लगता है।

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Head Writer for technology and AI at mpcgsamachar.in. He specializes in demystifying the latest advancements in Artificial Intelligence and the broader tech industry, providing readers with clear, insightful analysis on innovation and its real-world impact.

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